GTB अस्पताल में बच्चों की EEG मशीन महीनों से खराब, इलाज से पहले ही टूट रहा भरोसा
*GTB अस्पताल में बच्चों की EEG मशीन महीनों से खराब, इलाज से पहले ही टूट रहा भरोसा*
- दिल्ली। दिल्ली सरकार के बड़े सरकारी अस्पतालों में शुमार गुरु तेग बहादुर (GTB) अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर लापरवाही सामने आई है। अस्पताल में बच्चों के EEG (इलेक्ट्रोएन्सेफैलोग्राम) टेस्ट की मशीन लंबे समय से खराब पड़ी है, जिसके कारण मस्तिष्क संबंधी बीमारियों से जूझ रहे सैकड़ों बच्चे समय पर जांच से वंचित हैं।
EEG जांच बच्चों में मिर्गी, दौरे, बार-बार बेहोशी, असामान्य हरकतों और अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्याओं की पहचान के लिए अनिवार्य मानी जाती है। इसके बावजूद राजधानी के इस प्रमुख सरकारी अस्पताल में यह बुनियादी जांच सुविधा ठप पड़ी है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया।
रेफर की मार, लौटाए जा रहे बच्चे
EEG मशीन खराब होने के चलते GTB अस्पताल बच्चों को अन्य सरकारी अस्पतालों में रेफर कर रहा है। लेकिन हकीकत यह है कि दूसरे अस्पतालों में भी कई बार जांच नहीं हो पाती। कभी स्लॉट खत्म होने का बहाना, कभी मशीन उपलब्ध न होने की बात कहकर बच्चों को वापस लौटा दिया जाता है।
परिणामस्वरूप, मासूम मरीज और उनके परिजन एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल के बीच भटकने को मजबूर हैं, जबकि बीमारी जस की तस बनी रहती है।
इलाज रुका, खतरा बढ़ा
चिकित्सकों के अनुसार, न्यूरोलॉजिकल समस्याओं में समय पर EEG न होना इलाज में खतरनाक देरी पैदा करता है। सही जांच के बिना न तो बीमारी की पुष्टि हो पाती है और न ही दवाओं की सटीक शुरुआत। बच्चों के मामले में यह देरी भविष्य में गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकती है।
गरीबों के लिए निजी टेस्ट नामुमकिन
GTB अस्पताल में इलाज कराने वाले अधिकतर मरीज आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से आते हैं। निजी अस्पतालों और लैब में EEG टेस्ट का खर्च हजारों रुपये तक होता है, जिसे वहन करना कई परिवारों के लिए संभव नहीं। ऐसे में सरकारी अस्पताल की यह लापरवाही गरीब बच्चों को सीधे तौर पर इलाज से वंचित कर रही है।
प्रशासन मौन, जवाबदेही शून्य
सबसे गंभीर सवाल यह है कि EEG जैसी जरूरी मशीन आखिर कब से खराब है और अब तक क्यों नहीं ठीक की गई?
क्या मशीन की मरम्मत के लिए बजट नहीं है, या फिर फाइलें दफ्तरों में धूल खा रही हैं?
परिजनों का कहना है कि उन्होंने कई बार शिकायत की, लेकिन उन्हें सिर्फ “रेफर” शब्द सुनने को मिला।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल
राजधानी दिल्ली में, जहाँ स्वास्थ्य मॉडल की मिसालें दी जाती हैं, वहाँ एक बड़े सरकारी अस्पताल में बच्चों की EEG मशीन का लंबे समय तक खराब रहना सिस्टम की असंवेदनशीलता को उजागर करता है। यह सिर्फ एक मशीन की खराबी नहीं, बल्कि उन बच्चों के भविष्य का सवाल है, जिनका इलाज समय पर जांच पर निर्भर करता है।
मांग: तुरंत कार्रवाई हो
मरीजों के परिजन और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि:
EEG मशीन को तत्काल ठीक कराया जाए या नई मशीन लगाई जाए
बच्चों की जांच के लिए स्थायी और भरोसेमंद व्यवस्था सुनिश्चित की जाए
जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए
जब तक यह नहीं होता, तब तक GTB अस्पताल में आने वाले बच्चे इलाज से पहले ही व्यवस्था की मार झेलते रहेंगे।


